नई दिल्ली: भारत अब केवल हथियारों का आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। स्वदेशी तकनीक से विकसित ब्रह्मोस, अस्त्र, आकाश और आकाशतीर जैसे हथियारों की विदेशों में लगातार मांग बढ़ रही है। फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया, आर्मेनिया और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देश भारतीय रक्षा प्रणालियों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। युद्धक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन, कम लागत और विश्वसनीयता ने इन हथियारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया है।
ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती वैश्विक मांग
भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसे जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है। फिलीपींस पहले ही इस मिसाइल को अपनी तटीय सुरक्षा के लिए खरीद चुका है। वहीं वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी इसके निर्यात को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इसके अलावा यूएई, थाईलैंड, सऊदी अरब, ब्राजील और चिली जैसे देश भी ब्रह्मोस में रुचि दिखा रहे हैं।
अस्त्र मिसाइल बनी कई देशों की पसंद
डीआरडीओ द्वारा विकसित अस्त्र एक स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है। यह भारतीय वायुसेना के Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनात है। इंडोनेशिया ने इसे खरीदने का फैसला किया है, जबकि ब्राजील, आर्मेनिया, वियतनाम, मलेशिया और अल्जीरिया जैसे देश भी इसमें रुचि जता चुके हैं। इसकी लंबी मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक इसे वैश्विक बाजार में आकर्षक बनाती है।
आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की बढ़ी लोकप्रियता
आकाश सतह से हवा में मार करने वाली स्वदेशी मिसाइल प्रणाली है, जो 25 किलोमीटर तक दुश्मन के विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन को निशाना बना सकती है। आर्मेनिया पहले ही इसे खरीद चुका है, जबकि फिलीपींस के साथ भी बड़े सौदे पर बातचीत जारी है। वियतनाम, यूएई, मलेशिया और मिस्र जैसे देश भी इस एयर डिफेंस सिस्टम में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आकाशतीर सिस्टम ने बढ़ाया भारत का दबदबा
आकाशतीर भारत का स्वदेशी एआई आधारित एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने विकसित किया है। यह विभिन्न रडार और हथियार प्रणालियों को जोड़कर एकीकृत हवाई सुरक्षा नेटवर्क तैयार करता है। ड्रोन और मिसाइल जैसे आधुनिक खतरों से निपटने की इसकी क्षमता ने कई देशों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
क्यों बढ़ रही है भारतीय हथियारों की मांग?
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय हथियारों की बढ़ती मांग के पीछे कई वजहें हैं। इनका युद्ध में सफल प्रदर्शन, अपेक्षाकृत कम लागत, आसान रखरखाव और उच्च विश्वसनीयता विदेशी ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। साथ ही कई देश रूस और पश्चिमी देशों पर अपनी रक्षा निर्भरता कम करना चाहते हैं, ऐसे में भारत एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर रहा है। सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने भी इस क्षेत्र को नई गति दी है। भारत का रक्षा निर्यात लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और आने वाले वर्षों में इसके और तेज़ी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।